[2023] Technical Analysis in Hindi | शेयर मार्केट चार्ट कैसे समझें, चार्ट का टेक्निकल एनालिसिस कैसे करें

अगर आप शेयर मार्केट में नए हैं और शेयर मार्केट से पैसा कमाने की सोच रहे हैं, लेकिन आपको शेयर मार्केट चार्ट पढ़ना नहीं आता और न ही टेक्निकल एनालिसिस (Technical Analysis in Hindi) करना आता है, तो मैं आपकी इसमें मदद कर सकता हूं।

इस आर्टिकल में हमने बताया है कि स्टॉक मार्केट चार्ट कैसे देखें और चार्ट का टेक्निकल एनालिसिस कैसे करें, साथ ही किन-किन जगहों पर आप टेक्निकल एनालिसिस से पैसे कमा सकते हैं।

इस लेख के अंत तक, आप किसी भी स्टॉक या इंडेक्स का चार्ट विश्लेषण करने और उसकी बारीकियों को अपने व्यापारिक जीवन में लागू करने में सक्षम हो जाएँगे

तो चलिए इस आर्टिकल में शेयर मार्केट चार्ट को कैसे समझें और इसका चार्ट एनालिसिस कैसे करें के बारे में जानते हैं।

शेयर मार्केट चार्ट कैसे समझें (share market chart reading in Hindi)

विषय सूची

स्टॉक मार्केट में किसी भी स्टॉक या इंडेक्स के चार्ट को समझने के लिए या उस चार्ट का टेक्निकल एनालिसिस करने के लिए आपको कुछ बेसिक चीजों के बारे में पता होना चाहिए जैसे:

  • शेयर मार्केट चार्ट क्या है?
  • चार्ट कितने प्रकार के होते हैं?
  • स्टॉक तकनीकी विश्लेषण क्या है?
  • चार्ट का तकनीकी विश्लेषण कैसे करें

इन सभी बेसिक के बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है। इन चरणों का पालन करके आप जानेंगे कि शेयर मार्केट के चार्ट को कैसे समझें और उनका तकनीकी विश्लेषण कैसे करें।

शेयर मार्केट चार्ट क्या है? (Share Market Chart in Hindi)

शेयर मार्केट चार्ट एक ऐसा डैशबोर्ड है जिसमें हमें किसी स्टॉक का ऐतिहासिक मूल्य देखने को मिलता है, जो उस स्टॉक के ऐतिहासिक प्रदर्शन को दर्शाता है कि उस स्टॉक ने पिछले कुछ दिनों, हफ्तों या महीनों में कैसा प्रदर्शन किया है।

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Candle Chart (Credit by Upstox)

इसके साथ ही इस चार्ट में हमें कई तरह के टाइम फ्रेम, कई तरह के चार्ट और कई तकनीकी इंडिकेटर देखने को मिलते हैं जो इस चार्ट को समझने में हमारी मदद करते हैं।

जिसका प्रयोग करके हम उस शेयर के भविष्य की कीमत का अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं और उसी के आधार पर ट्रेडिंग करते हैं।

यहीं पर हमें उस शेयर को खरीदने और बेचने का विकल्प मिलता है, जिसके जरिए हम उस शेयर को खरीद सकते हैं और उसमें अपना पैसा निवेश कर सकते हैं या फिर हम उस शेयर में इंट्राडे ट्रेडिंग कर सकते हैं।

शेयर मार्केट में चार्ट कितने प्रकार के होते हैं? (How many types of charts in the stock market?)

वैसे तो शेयर मार्केट में कई तरह के चार्ट उपलब्ध हैं, लेकिन हमने 7 ऐसे चार्ट्स के बारे में बताया है, जिनका शेयर मार्केट में काफी इस्तेमाल होता है, जो इस प्रकार हैं:

  • लाइन चार्ट (line chart)
  • बार चार्ट (bar chart)
  • एरिया चार्ट (area chart)
  • कैंडल चार्ट (candle chart)
  • होलो कैंडल्स चार्ट (hollow candles chart)
  • हाइकिन-आशी चार्ट (heikin-ashi chart)
  • बेसलाइन चार्ट (baseline chart)

ट्रेडिंग के लिए हमें कौन सा चार्ट देखना चाहिए?

इन सभी चार्ट में से केवल एक का उपयोग तकनीकी विश्लेषण के लिए अधिक किया जाता है, जो कि कैंडल चार्ट है, क्योंकि यह चार्ट तकनीकी विश्लेषण के लिए उपयोग किए जाने वाले अन्य सभी चार्ट की तुलना में अधिक जानकारी देता है।

कैंडलस्टिक चार्ट में, हमें किसी भी स्टॉक के बारे में चार प्रकार के डेटा मिलते हैं: Open, Close, High और Low

candle chart in hindi
Candle Chart in Hindi
  • Open: ओपन का मतलब होता है कि बाजार खुलने के समय उस स्टॉक की कीमत क्या थी, जिसे ओपन प्राइस कहा जाता है।
  • Close: क्लोज का मतलब होता है कि बाजार बंद होने पर उस शेयर की कीमत क्या थी, जिसे क्लोजिंग प्राइस कहा जाता है।
  • High: High का मतलब है कि आज उस शेयर की कीमत कितनी ऊपर गई थी, जिसे हायर प्राइस कहा जाता है।
  • Low: Low का मतलब है कि आज उस शेयर की कीमत कितनी नीचे गई थी, जिसे लोअर प्राइस कहा जाता है।

इन चार कीमतों में से, जो सबसे अधिक उपयोगी है वह क्लोजिंग प्राइस है क्योंकि यह दर्शाता है कि आज के दिन शेयर की कीमत कितनी मजबूत रही। यदि इसकी क्लोजिंग प्राइस ओपन प्राइस से ऊपर है, तो इसे तेजी का दिन कहा जाता है। इसी तरह, अगर इसकी क्लोजिंग कीमत ओपनिंग कीमत से नीचे है, तो इसे मंदी का दिन कहा जाएगा।

क्लोजिंग प्राइस का उपयोग अगले दिन के लिए सपोर्ट या रेजिस्टेंस के रूप में किया जाता है।

तकनीकी विश्लेषण क्या है? (What is Technical Analysis in Hindi)

टेक्निकल एनालिसिस का मतलब है कि हम किसी स्टॉक के चार्ट में प्राइस एक्शन को देखकर अपनी एंट्री और एग्जिट का पता लगाते हैं। आसान शब्दों में समझें तो शेयर को कब खरीदना है, कब बेचना है और कितने समय तक होल्ड करना है, यह सब टेक्निकल एनालिसिस से ही पता चलता है। टेक्निकल एनालिसिस का इस्तेमाल ज्यादातर ट्रेडिंग के लिए किया जाता है, चाहे वह इंट्राडे ट्रेडिंग हो, स्विंग ट्रेडिंग हो या ऑप्शन और फ्यूचर ट्रेडिंग हो

टेक्निकल एनालिसिस क्या होता है और हमें कैसे पता चलता है कि मार्केट ऊपर जाएगा या नीचे और हम उस चार्ट में क्या देखते हैं कि हम उसमें एंट्री और एग्जिट तय करते हैं।

तकनीकी विश्लेषण का अर्थ है कि ऐसी घटना जो इतिहास में घटी हो और बार-बार दोहराई जा रही हो, तो इस घटना के बारे में पता लगाना तकनीकी विश्लेषण कहलाता है।

हमें चार्ट में कुछ ऐसी कैंडल्स दिखाई देती हैं, जो बताती हैं कि जब भी यह कैंडल बनती है, तो इसकी कीमत ऊपर या नीचे होने लगती है और अगर यह घटना बार-बार होती है, तो इस घटना को पकड़ना एक तकनीक कहलाता है, और इस तकनीक पर गहन शोध करना विश्लेषण कहलाता है। और इन दोनों के संयोजन को तकनीकी विश्लेषण कहा जाता है।

आपको बता दें कि शेयर बाजार से पैसा कमाने के दो तरीके होते हैं एक निवेश के जरिए और दूसरा ट्रेडिंग के जरिए।

निवेश में, हम एक स्टॉक में लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं, और इसे कम्पाउंडिंग होने के लिए छोड़ देते हैं, और उस स्टॉक के डिविडेंड और शेयर की कीमत बढ़ने से पैसा कमाते हैं। इसमें किसी स्टॉक को उसके फंडामेंटल एनालिसिस के आधार पर चुना जाता है और फिर उसमे लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाता है।

निवेश के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह पोस्ट पढ़ें (शेयर मार्केट में निवेश कैसे करें)

लेकिन ट्रेडिंग में हम शेयर मार्केट से जल्दी पैसा बनाने के बारे में सोचते हैं, जिसके लिए तकनीकी विश्लेषण की आवश्यकता होती है।

ट्रेडिंग में तकनीकी विश्लेषण क्यों महत्वपूर्ण है (Why technical analysis is important in trading)

यदि आप तकनीकी विश्लेषण सीखे बिना ट्रेडिंग करते हैं, तो आप बहुत बड़ा जोखिम ले रहे हैं, और यह शेयर बाजार में जुआ खेलने के बराबर है।

आपको लगता है कि इस शेयर की कीमत बढ़ने वाली है, इसलिए आप इसमें ट्रेडिंग करते हैं, लेकिन ज्यादातर समय आप लॉस कर जाते हैं। कभी-कबार भाग्य आपका साथ देगा और आप उससे धन कमाने में सफल होंगे, लेकिन अधिकांश समय आपको नुकसान उठाना पड़ेगा।

हमारा उद्देश्य आपको सरल भाषा में तकनीकी विश्लेषण सिखाना है, और आप तकनीकी विश्लेषण जितनी आसानी से सीख लेंगे, आपके लिए उतना बेहतर होगा क्योंकि तकनीकी विश्लेषण बहुत से लोगों के लिए बहुत बोरिंग का विषय होता है, जिसके कारण वे तकनीकी विश्लेषण नहीं कर पाते हैं और भाग्य के भरोसे ट्रेडिंग करने लगते है।

लेकिन इस पोस्ट में, हमने तकनीकी विश्लेषण को इतने सरल शब्दों में चरण दर चरण समझाया है कि आपको तकनीकी विश्लेषण से प्यार हो जाएगा, और आप आसानी से किसी भी स्टॉक या इंडेक्स चार्ट का तकनीकी विश्लेषण कर पाएंगे और अपनी ट्रेडिंग यात्रा को बेहतर बना पाएंगे।

तकनीकी विश्लेषण कैसे करें (Technical Analysis kaise kare in Hindi)

शेयर बाजार में किसी भी चार्ट का टेक्निकल एनालिसिस करने के लिए उस चार्ट पर कई चीजों को देखना होता है, जैसे

  • ट्रेंड
  • कैंडलस्टिक पैटर्न
  • चार्ट पैटर्न
  • सपोर्ट और रेजिस्टेंस
  • टाइम फ्रेम

इसके साथ ही टेक्निकल विश्लेषण की एक्यूरेसी बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के इंडीकेटर्स का उपयोग किया जाता है

स्टॉक मार्केट में ट्रेंड क्या है (What is Trend in Stock Market)

अगर आप स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग के जरिए पैसा कमाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको टेक्निकल एनालिसिस करना होगा और टेक्निकल एनालिसिस में सबसे पहले जो चीज देखी जाती है वह है ट्रेंड यानी दिशा और यही दिशा हमें शेयर बाजार की चाल बताती है। कि शेयर बाजार की कीमत किस दिशा में जा रही है और किस आधार पर हम इसमें व्यापार कर सकते हैं।

ट्रेंड कितने प्रकार के होते है (Types of Trend in Stock Market)

शेयर बाजार में तीन तरह के ट्रेंड्स होते हैं।

uptrend and downtrend
uptrend and downtrend
  • अपट्रेंड (Uptrend)
  • डाउनट्रेंड (Downtrend)
  • साइडवेज़ या कंसोलिडेट (Sideways & Consolidate)

अपट्रेंड का मतलब है: कि उस शेयर की कीमत कई दिनों से ऊपर की दिशा में बढ़ रही है, जिससे हायर हाई और हायर लौ का पैटर्न बनता है, जिसे अपट्रेंड और तेजी का बाजार कहा जाता है।

डाउनट्रेंड का मतलब है: कि उस स्टॉक की कीमत कई दिनों से नीचे की दिशा में बढ़ रही है, जिससे लोअर लौ और लोअर हाई का पैटर्न बनता है, जिसे डाउनट्रेंड और मंदी का बाजार कहा जाता है।

साइडवेज़ का मतलब है: कि उस शेयर की कीमत कई दिनों से एक ही स्तर पर है, जिसे “स्ठर बाजार” कहा जाता है।

शेयर मार्केट में कैंडल पैटर्न क्या है? (Share Market Candlestick Patterns in Hindi)

स्टॉक मार्केट में कैंडलस्टिक पैटर्न एक तरह का कैंडल से बना पैटर्न है, जो एक बॉडी, हेड और टेल से मिलकर बनता है। यह कैंडल किसी स्टॉक या इंडेक्स के चार्ट में चार तरह की कीमतों के बारे में बताते है, जैसे ओपन प्राइस, हाई प्राइस, लो प्राइस और क्लोजिंग प्राइस।

candlestick pattern in hindi
candlestick pattern in hindi

इस जानकारी के कारण, तकनीकी विश्लेषण के लिए कैंडलस्टिक चार्ट का उपयोग सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

यह कैंडल चार्ट में दो रंगों से बनती है: लाल कैंडल मंदी (Bearish) का प्रतिनिधित्व करती है और हरी कैंडल तेजी (Bullish) का प्रतिनिधित्व करती है।

कैंडलस्टिक के सभी पैटर्न जानने के लिए इस पोस्ट को पढ़ें। Candlestick Pattern in Hindi

शेयर मार्केट में चार्ट पैटर्न क्या है (Share Market Chart Pattern in Hindi)

चार्ट पैटर्न एक प्रकार का पैटर्न है जिसमें एक चार्ट पर कई कैंडलस्टिक होती हैं, और ये कैंडलस्टिक हमें सपोर्ट और रेजिस्टेंस के साथ-साथ बाजार के ट्रेंड की पहचान करने और प्राइस मूवमेंट की भविष्यवाणी करने में सक्षम बनाता हैं। यह हमें ट्रेडिंग के समय लक्ष्यों पर निर्णय लेने, हानियों को रोकने, प्रवेश करने और बाजार से बाहर निकलने में मदद करता है।

इसलिए चार्ट पैटर्न को टेक्निकल एनालिसिस का अहम हिस्सा माना जाता है और इनके जरिए ज्यादातर लोग स्विंग ट्रेडिंग करते हैं।

सभी प्रकार के चार्ट पैटर्न के बारे में जानने के लिए इस पोस्ट को पढ़ें। (चार्ट पैटर्न कितने प्रकार के होते हैं?)

शेयर बाजार में तकनीकी इंडिकेटर क्या है (What is Technical Indicator in Stock Market)

शेयर बाजार में तकनीकी संकेतक ऐसे उपकरण हैं जो स्टॉक का तकनीकी विश्लेषण करने में हमारी मदद करते हैं। इसमें कई प्रकार के संकेतक हैं जो विभिन्न प्रकार के डेटा प्रदान करते हैं, और इन आंकड़ों के आधार पर, कई ट्रेडर्स ट्रेडिंग करने और इससे पैसा बनाने का निर्णय लेते हैं।

तकनीकी संकेतक व्यापारियों के लिए तकनीकी विश्लेषण करना आसान बनाते हैं और उनके व्यापारिक निर्णयों के लिए अधिक सटीकता प्रदान करते हैं। लेकिन इनमें से कुछ संकेतक कभी-कभी झूठे संकेत देते हैं, इसलिए संकेतक का उपयोग पुष्टि के लिए करें, न कि निर्णय लेने के लिए।

हमने नीचे कुछ प्रकार के तकनीकी संकेतकों के बारे में बताया है

तकनीकी इंडिकेटर के प्रकार (Type of Technical Indicators in Hindi)

तकनीकी इंडिकेटर दो प्रकार के होते हैं, जैसे:

Leading Indicators: लीडिंग इंडिकेटर शब्द का अर्थ है कि यह प्राइस के आगे बढ़ता है और पहले से ही बाजार के ट्रेंड में रिवर्सल (परिवर्तन) या एक नए ट्रेंड के बनने का संकेत देता है। जो किसी भी ट्रेडर के लिए दिलचस्प हो सकता है, लेकिन यहां आपको ध्यान देना होगा कि इनमें से कुछ लीडिंग संकेतक झूठे संकेत दे सकते हैं। इसलिए, लीडिंग संकेतकों का उपयोग करते समय व्यापारी को बेहद सावधान रहना चाहिए। और इनका उपयोग केवल पुष्टि के लिए करें, निर्णय लेने के लिए नहीं।

अधिकांश लीडिंग इंडिकेटर को ऑसिलेटर्स (Oscillators) कहा जाता है क्योंकि वे एक तय सीमा के भीतर ही घूमता हैं, जैसे कि यदि किसी इंडिकेटर की तय सीमा 0 और 100 के बीच है, तो यह इसके बीच घूमता रहेगा। लीडिंग इंडिकेटर के कुछ उदाहरण जैसे- RSI, Stochastic Oscillator or MACD

Lagging Indicators: लैगिंग इंडिकेटर शब्द का अर्थ है कि यह प्राइस के पीछे चलता है और बाजार के ट्रेंड में रिवर्सल (परिवर्तन) या एक नए ट्रेंड के बनने के बाद संकेत देता है। इससे आपको लगेगा कि ये इंडिकेटर किसी काम का नहीं हैं, लेकिन टेक्निकल एनालिसिस के लिए इस इंडिकेटर का काफी इस्तेमाल होता है, क्योंकि यह देर से ही सही लेकिन सटीक जानकारी देता है, जिससे ट्रेडर्स को इस बात की पुष्टि होती है कि इस तरह का चार्ट पैटर्न में है। उन्हें व्यापार के अवसर मिल सकते थे। लैगिंग इंडिकेटर के कुछ उदाहरण जैसे- Moving Averages

इन सभी प्रकार के इंडीकेटर्स के बारे में जानने के लिए इस पोस्ट को पढ़ें।

सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस क्या है? (What is Support and Resistance)

किसी भी स्टॉक के चार्ट में दो तरह के लेवल होते हैं:

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  • सपोर्ट लेवल (Support Level)
  • रेजिस्टेंस लेवल (Resistance Level)

सपोर्ट लेवल: उसे कहते है जहाँ उस शेयर का प्राइस आकर रुक जाता है जिसका मतलब है की इस जगह पर Buyers अधिक है Sellers की अपेछा और यह Buyers इस शेयर के प्राइस को और निचे नहीं जाने देते

जिसके कारण शेयर की डिमांड बढ़ने लगती है और फिर उस शेयर का प्राइस ऊपर जाने लगता है अधिकांश ट्रेडर इसी की तलाश में बैठे रहते है और जैसे ही उन्हें सपोर्ट लेवल दिखाई देता है तो वह एक बार उसकी पक्की कन्फोर्मशन का इंतजार करते है और कन्फोर्मशन मिलते ही ट्रेडिंग के लिए पोजीशन बनाने लगते है

रेजिस्टेंस लेवल: उसे कहते है जहाँ उस शेयर का प्राइस जाकर रुक जाता है जिसका मतलब है की उस जगह पर Sellers अधिक है Buyers की अपेछा और Seller इस शेयर के प्राइस को और ऊपर नहीं जाने देते

जिसके कारण शेयर का प्राइस निचे आने लगता है ऐसा इसलिए क्योकि वह बुएरस जिन्होंने कुछ समय पहले इस स्टॉक में पोजीशन बनाई थी अब वह लोगो प्रॉफिट बुकिंग कर रहे है जिससे शेयर का प्राइस निचे गिरने लगता है

तकनीकी विश्लेषण के लिए समय सीमा (Technical Analysis Time Frame)

किसी भी स्टॉक का टेक्निकल एनालिसिस करने के लिए हमें अलग-अलग तरह के टाइम फ्रेम्स की जरूरत होती है ताकि हम उसके चार्ट्स को अलग-अलग टाइम फ्रेम्स में देख सकें और उसका टेक्निकल एनालिसिस कर सकें जिससे हम ट्रेडिंग के लिए एक निश्चित फैसला ले सकें।

अधिकांश व्यापारियों द्वारा चुनी गई समय सीमा इस प्रकार है:

  • 5 मिनट का चार्ट
  • 15 मिनट का चार्ट
  • 1 घंटा का चार्ट
  • 4 घंटे का चार्ट
  • 1 दिन का चार्ट

इसके साथ ही इंट्राडे ट्रेडिंग और स्विंग ट्रेडिंग के लिए तकनीकी विश्लेषण में उपयोग की जाने वाली समय सीमा के बारे में नीचे दिया गई है।

इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए कौन सा टाइम फ्रेम सबसे अच्छा है? (Which time frame is best for Intraday trading?)

इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान किसी कंपनी के तकनीकी विश्लेषण के लिए 1 मिनट, 5 मिनट और 15 मिनट की समय सीमा बेस्ट होती है।

लेकिन ट्रेडिंग के लिए बाजार खुलने के साथ के 2 घंटे और आखिरी के 2 घंटे सबसे अच्छे माने जाते हैं, इस दौरान ट्रेडिंग में वॉल्यूम अधिक होता है, जिससे उस स्टॉक की कीमत में और अधिक उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है, इस प्रकार इंट्राडे के अवसर पैदा होते हैं।

स्विंग ट्रेडिंग के लिए कौन सा टाइम फ्रेम सबसे अच्छा है? (Which time frame is best for swing trading?)

किसी स्टॉक में स्विंग ट्रेडिंग के लिए तकनीकी विश्लेषण बहुत महत्वपूर्ण है, और इससे भी महत्वपूर्ण, सही समय चुनना; ज्यादातर ट्रेडर स्विंग ट्रेडिंग के लिए 4-घंटे और 1-दिन के चार्ट को एनालिसिस के लिए पसंद करते हैं।

और इसमें entry लेने की कोई समय सीमा नहीं है; जैसे ही आपको इसमें ट्रेड करने का अवसर मिलता है, आप प्रवेश कर सकते हैं और लक्ष्य मूल्य पूरा होते ही बाहर निकल सकते हैं। किसी भी तरह की ट्रेडिंग करने से पहले आपको नुकसान को काम करने के लिए उसमें स्टॉप लॉस लगाना बहुत जरुरी है।

इन सब को जानने के बाद आप टेक्निकल एनालिसिस करना तो सीख जाएंगे, लेकिन ट्रेडिंग में सटीकता लाने में आपको समय लग सकता है।

अगर आप शेयर बाजार में नए हैं और जानते हैं कि ट्रेडिंग से पैसा बनाने के लिए टेक्निकल एनालिसिस आना बहुत जरूरी है जिससे आप कुछ हफ़्तों या महीनों में तकनीकी विश्लेषण सीख जाते हैं और अब सोचते हैं कि आप ट्रेडिंग से पैसा कमा सकते हैं, तो आप गलत हैं क्योंकि तकनीकी विश्लेषण सीखने के बाद भी आप ट्रेडिंग में नुकसान कर सकते हैं। तकनीकी विश्लेषण में सटीकता प्राप्त करने में आपको 1 से 2 वर्ष का समय लग सकता है।

जिसे आप कर करके सीखेंगे और इसके लिए आप पेपर ट्रेडिंग या कैश ट्रेडिंग कर सकते हैं।

पेपर ट्रेडिंग क्या होती है (What is paper trading)

पेपर ट्रेडिंग वास्तव में किसी भी पैसे का निवेश किए बिना पूरी तरह से वर्चुअल सेटिंग में स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग का अभ्यास है। इस पृथक आभासी वातावरण में जो कुछ भी होता है या कारोबार होता है, उसका वास्तविक शेयर बाजार पर कोई असर नहीं पड़ता है।

आसान शब्दों में समझे तो पेपर ट्रेडिंग में, हम पहले किसी स्टॉक का तकनीकी विश्लेषण करते हैं और फिर उस विश्लेषण के आधार पर रणनीति बनाते हैं, जिसे हम अपनी नोटबुक में लिख लेते हैं। उस रणनीति में, हम यह निर्धारित करते हैं कि बाजार में कब प्रवेश करना है और कब बाहर निकलना है। और फिर, दिन के अंत में, उस रणनीति का परीक्षण करके देखें कि आपकी रणनीति काम कर रही है या नहीं।

यदि आपकी रणनीति काम करती है, तो हर दिन इसके प्रदर्शन की जाँच करें, और महीने के अंत में यह निर्धारित करें कि यह कितनी बार सफल और असफल रहा।

यदि आपकी रणनीति एक महीने में 70 से 80 प्रतिशत सही हो जाती है, तो समझ लें कि आप तकनीकी विश्लेषण अच्छी तरह सीख रहे हैं, और जल्द ही आप ट्रेडिंग से बहुत पैसा कमा सकते हैं।

कैश ट्रेडिंग क्या है (What is cash trading)

कैश ट्रेडिंग स्टॉक ट्रेडिंग को संदर्भित करता है क्योंकि इसमें पूंजी की आवश्यकता होती है, और कैश ट्रेडिंग केवल 100 रुपये के साथ शुरू की जा सकती है। इसमें हम किसी भी स्टॉक के एक शेयर में ट्रेडिंग कर सकते हैं।

जब आप पेपर ट्रेडिंग में महारत हासिल करते हैं, तो आपको कैश ट्रेडिंग की ओर बढ़ना चाहिए क्योंकि वास्तविक बाजार में ट्रेडिंग का मनोविज्ञान पेपर ट्रेडिंग से अलग होता है, जहां कई लोगों का पेपर ट्रेडिंग बहुत अच्छा होता है, लेकिन वास्तविक बाजार में ट्रेडिंग करने पर उन्हें नुकसान का अनुभव होने लगता है।

Conclusion – शेयर मार्केट चार्ट कैसे समझें

आज के इस पोस्ट में हमने वह तरीका बताया है जिसे फॉलो करके हम किसी स्टॉक या इंडेक्स का टेक्निकल एनालिसिस करना सिख जायँगे यहाँ पर जिन जिन चीजों के ऊपर बात हुई है आप उनके बारे में सिख सकते है और फिर टेक्निकल एनालिसिस के आधार पर ट्रेडिंग करने लगेंगे

इस पोस्ट में हमने स्टॉक मार्किट चार्ट कैसे समझे, चार्ट कितने प्रकार के होते है, हमें ट्रेडिंग के लिए कौन सा चार्ट देखना चाहिए, टेक्निकल एनालिसिस क्या होता है, टेक्निका एनालिसिस क्यों जरुरी है, चार्ट का टेक्निकल एनालिसिस कैसे करे आदि जैसे जरुरी तथ्यों के बारे में जाना।

आपको हमारी यह पोस्ट कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताये स्टॉक मार्किट से सम्बंधित किस भी प्रश्न को बे जिझक कमेंट के जरिये पूछे हम आपके जवाब जरूर देंगे, धन्यवाद।

FAQs about Technical Analysis in Hindi

  1. शेयर मार्केट चार्ट कैसे देखें

    शेयर मार्केट चार्ट देखने का सबसे आसान तरीका इसकी मूल बातें जानना है, जैसे कीमत, कैंडलस्टिक पैटर्न, चार्ट पैटर्न, समय सीमा, सपोर्ट और रेजिस्टेंस इत्यादि, जिसे हमने इस पोस्ट में विस्तार से बताया है।

  2. चार्ट का टेक्निकल एनालिसिस कैसे करें

    शेयर बाजार में चार्ट का तकनीकी विश्लेषण करने के लिए आपको कुछ महत्वपूर्ण चीजों जैसे सपोर्ट और रेजिस्टेंस, कैंडलस्टिक पैटर्न, चार्ट पैटर्न, ट्रेंड, टाइम फ्रेम आदि के बारे में पता होना चाहिए, जिन्हें इस पोस्ट में विस्तार से बताया गया है।


  3. ट्रेडिंग के लिए हमें कौन सा चार्ट देखना चाहिए?

    ट्रेडिंग के लिए, हमें कैंडल चार्ट को देखना चाहिए, क्योंकि इस चार्ट में किसी भी अन्य चार्ट की तुलना में अधिक जानकारी उपलब्ध है। क्योंकि तकनीकी विश्लेषण के लिए, हमें चार प्रकार के डेटा की आवश्यकता होती है जैसे : Open, Close, High and Low

  4. इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए कौन सा टाइम फ्रेम सबसे अच्छा है?

    स्टॉक का तकनीकी विश्लेषण के लिए 1 मिनट, 5 मिनट और 15 मिनट और ट्रेडिंग करने के लिए (सुबह 9:20 से 11 बजे तक) और (दोपहर 1:30 से दोपहर 3 बजे तक) को इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है क्योंकि इस समय वॉल्यूम में ट्रेडिंग होती है, जिससे बाजार को हाई मूवमेंट मिलता है

  5. स्विंग ट्रेडिंग के लिए कौन सा टाइम फ्रेम सबसे अच्छा है?

    स्टॉक का तकनीकी विश्लेषण के लिए 4-घंटे और 1-दिन का टाइम फ्रेम और ट्रेडिंग के लिए कोई भी समय सीमा हो सकती है और जानने के लिए पोस्ट को पढ़े

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